ArpitGarg's Weblog

An opinion of the world around me

याद

leave a comment »

yaad.jpg

आज भी याद है मुझे वो दुपट्टा तेरा,
सुनहरा था रंग, दिल गया था मेरा,
उस पर से झबरे से तेरे बाल हाय,
क़त्ल होना ही बस बाकी था बचा|

बचपना तेरा, हर बात पे हठ करना,
जाने कब तेरी बातें अच्छी लगने लगीं,
जाने कब मुलाकातें सच्ची लगने लगीं,
क़त्ल होना ही बस बाकी था बचा|

आँखें तेरी, पल्कें झुकना औचक,
तीर सा मेरे सीने में आके लग जाना,
बिन काजल भी तू थी मृगनयनी,
क़त्ल होना ही बस बाकी था बचा|

साँसों का साँसों से टकराना उफ्फ,
याद है मुझे नशे सा, न भूल सका में.
आह और चाह का सफर दूभर,
क़त्ल होना ही बस बाकी था बचा|

छमक छमक चलना माशाअल्लाह,
और मिलना बचके नज़रों से सबकी,
वो चेहरे पे मुस्कान से आती सिलवट,
क़त्ल होना ही बस बाकी था बचा|

न जाने क्यों किस्मत रूठी सी थी,
न जाने क्यों हिम्मत छोटी सी थी,
जो हाथ छोड़ा, और तन्हाई ओड़ा,
क़त्ल होना ही बस बाकी था बचा|

Advertisements

Written by arpitgarg

January 12, 2018 at 6:48 am

Posted in Hindi, Love, Poetry, Uncategorized

Tagged with ,

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: