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हँसना सिखा दिया

with one comment

love

मेरे दिल ने दर्द के साथ रहना सीख लिया था,
आँखों ने हमदर्द का खोना देख लिया था,
बातों ने खामोशी का गहना ओड लिया था,
क्यों तूने इस सोते दिल को जगा दिया,
क्यों तूने घायल अरमानों को हवा किया,
क्यों तूने आंखों को टिमटिमाना सिखा दिया,
क्यों तूने बेगाने को पशोपेश में फसा दिया|

मेरे नासूर जख्मों ने तड़पाना छोड़ दिया था,
मेरे मन ने भारी गम से समझौता किया था,
मेरे सपनों ने अपनों का खोना भांप लिया था,
मेरे रातों ने ओझिल हो जाना मान लिया था,
क्यों तेरे स्पर्श ने घायल मुझको दवा दिया,
क्यों मुझको फिर से हँसना सिखा दिया,
क्यों मेरे सपनों की महफ़िल को सजा दिया,
क्यों रातों में फिर बातें करना बता दिया||

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Written by arpitgarg

January 21, 2018 at 2:28 am

Posted in Hindi, Love, Poetry

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One Response

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  1. लाजवाब
    बहुत शानदार👍👌👍

    Gautam Diljaan

    February 3, 2018 at 10:45 pm


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