ArpitGarg's Weblog

An opinion of the world around me

सो पाऊँ

leave a comment »

confusion.jpg

थोड़ी असमंजस में हूँ यारों,
किस राह चलूँ ये बूझूँ मैं,
या खटिया डाल के सो जाऊं?

कुछ करने को करे न मन,
बांधूं औ हो जाऊं कण-२,
या चादर ओढ़ के सो जाऊं?

खा के डाकारूं, डकार के खाऊं,
कभी हफ्ते-२ नहीं नहाऊँ,
या तकिया लगा के सो जाऊं?

आधे अधूरे ख्वाब हैं आते,
पूरा कैसे उनको कर पाऊँ?
या बत्ती बुझा के सो जाऊं?

दिल धक-२ कर धड़क उठे,
लगे के जैसे मैं उड़ जाऊं?
या ख्वाब संजो के सो जाऊं?

कुछ राह मिले, तो चाह मिले,
सुकून आये, जब साँझ ढले,
अब उठूँ, ताकि कल सो पाऊँ॥

Written by arpitgarg

January 12, 2016 at 11:02 pm

Posted in Hindi, Poetry

Tagged with , ,

Leave a comment