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याद

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आज भी याद है मुझे वो दुपट्टा तेरा,
सुनहरा था रंग, दिल गया था मेरा,
उस पर से झबरे से तेरे बाल हाय,
क़त्ल होना ही बस बाकी था बचा|

बचपना तेरा, हर बात पे हठ करना,
जाने कब तेरी बातें अच्छी लगने लगीं,
जाने कब मुलाकातें सच्ची लगने लगीं,
क़त्ल होना ही बस बाकी था बचा|

आँखें तेरी, पल्कें झुकना औचक,
तीर सा मेरे सीने में आके लग जाना,
बिन काजल भी तू थी मृगनयनी,
क़त्ल होना ही बस बाकी था बचा|

साँसों का साँसों से टकराना उफ्फ,
याद है मुझे नशे सा, न भूल सका में.
आह और चाह का सफर दूभर,
क़त्ल होना ही बस बाकी था बचा|

छमक छमक चलना माशाअल्लाह,
और मिलना बचके नज़रों से सबकी,
वो चेहरे पे मुस्कान से आती सिलवट,
क़त्ल होना ही बस बाकी था बचा|

न जाने क्यों किस्मत रूठी सी थी,
न जाने क्यों हिम्मत छोटी सी थी,
जो हाथ छोड़ा, और तन्हाई ओड़ा,
क़त्ल होना ही बस बाकी था बचा|

Written by arpitgarg

January 12, 2018 at 6:48 am

Posted in Hindi, Love, Poetry, Uncategorized

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