ArpitGarg's Weblog

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चार भौंकते कुत्ते

with 3 comments

सपने में आते हैं मेरे,
डरता हूँ मैं, खौफनाक ,
क्यों न मुझको सोने देते,
वो चार भौंकते कुत्ते|

मैंने क्या बिगाड़ा तेरा है,
क्या ऐसा पाप किया है,
सुख चैन हर ले गए जो,
वो चार भौंकते कुत्ते|

एक बेचैनी सी छाई है,
पसीना पसीना हुआ हूँ मैं,
क्यों दिल को मेरे धड्काते,
वो चार भौंकते कुत्ते|

सुनसान गली, रास्ता तंग,
घेर लिया मुझे चारों ओर,
मेरे पापों की गिनती करवाते,
वो चार भौंकते कुत्ते|

काँप रहा मैं, ठण्ड लगी,
मुख में मेरे आवाज दबी,
राम नाम मुझसे जपवाते,
वो चार भौंकते कुत्ते|

तभी एक तेज रोशनी दिखी,
आँखें खुली, कुछ साफ़ हुआ,
मुझे साहस देने आये थे,
मेरे डर को भागने आये थे,
मुझे हिम्मत देके चले गए,
मेरे डर को लेके चले गए,
वो चार भौंकते कुत्ते|

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Written by arpitgarg

August 29, 2011 at 6:27 pm

Posted in Hindi, Poetry

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3 Responses

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  1. Haha… awesome.

    pankaaaz

    August 29, 2011 at 9:44 pm

    • frm last 2 weeks or so…have been getting nightmares of barking dogs…i hope hey wud lick me tonite after this humor…

      arpitgarg

      August 29, 2011 at 11:23 pm

  2. bho vho bho bho

    testc

    August 29, 2011 at 6:34 pm


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