ArpitGarg's Weblog

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रात जवां, अभी ढली नहीं

with 2 comments

नश्तर से नैन तेरे चल जाते,
जब तब, घायल कर जाते,
दिल को मेरे हाय, तब तब,
थोडा ठहर, न हो रुखसत,
रात जवां, अभी ढली नहीं|

प्यारी सी हँसी, कोमल पंखुडियां,
होठ तेरे, ललचाते मुझको,
शर्म से लाल गाल तेरे,
कितना रोकूँ, तड़पाते मुझको,
थोडा ठहर, न हो रुखसत,
रात जवां, अभी ढली नहीं|

जब होती है तू उदास, रोता है,
मन मेरा, दुखता अन्दर कुछ मेरे,
मत बहाना कभी तू आंसू,
बहुत कीमती हैं, पूछ मुझसे,
थोडा ठहर, न हो रुखसत,
रात जवां, अभी ढली नहीं|

जुल्फें तेरी, उलझी सुलझी,
हर वक़्त तेरा जूझना उनसे,
पर जैसी भी हैं, भाता है मुझे,
उंगलियाँ जब फसती हैं मेरी,
थोडा ठहर, न हो रुखसत,
रात जवां, अभी ढली नहीं|

बचपना तेरा, इतराना, कट्टी,
हंस पड़ता हूँ, बंद आँखें करके,
मेरे छूने से होती सिरहन तुझे,
तुझे परेशां करता मैं हक़ से हूँ,
थोडा ठहर, न हो रुखसत,
रात जवान, अभी ढली नहीं|

जाना है तो जा, न पीछा
करूंगा मैं, बस निगाहें मेरी,
रुखसत भी हो गयी जो तू,
अहसास को कैसे ले जायेगी,
कितना भी दूर चली जा,
यह रात लौटकर फिर आएगी||

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Written by arpitgarg

September 5, 2011 at 12:30 am

Posted in Hindi, Love, Poetry

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2 Responses

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  1. jo ho gaya so ho gaya,
    jo kho gaya so kho gaya
    jo jal gaya woh raak hai
    jo shesh hai woh swarn hai
    molekar rakhdeejiye

    parwatisingari

    September 5, 2011 at 8:29 am


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