ArpitGarg's Weblog

An opinion of the world around me

गया काम से तू

leave a comment »

लबों की वो लाली,
पल पल की गाली,
चढ़ती मदहोशी साली,
गया काम से तू|

थी जुराबें गुलाबी,
छंछंनाती पाजेबें,
मोरनी से हैं पंजे,
गया काम से तू|

मटकती सी आँखें,
दिल में हैं झांकें,
हैं नश्तर चलाती,
गया काम से तू|

उलझी सी जुल्फें,
कि थोड़ी तो सुल्झा,
लगाती हैं फांसी
गया काम से तू|

इधर तिल उधर तिल,
थकता ना गिन गिन,
हैं नजरें चुराते,
गया काम से तू|

मजबूर है दिल,
बड़ा है ये कातिल,
जबसे उसे मिल
गया काम से तू||

Advertisements

Written by arpitgarg

September 2, 2012 at 12:16 am

Posted in Hindi, Poetry

Tagged with , , , ,

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s

%d bloggers like this: