Posts Tagged ‘maasha allah’
माशाअल्ला

नयनों में सुरमा लगाए जब,
तीर सा कुछ चल जाता है,
बढ़ती है धड़कन दिल की,
तू लगती है माशाअल्ला।
लाली ओठों की कुछ ऐसी,
मादक मंद मुस्काती है,
सांस मेरी थम जाती है,
तू लगती है माशाअल्ला।
हिरनी जैसी चाल तेरी जो,
करती मौसम अस्त व्यस्त,
मैं भँवरा बन मंडराता हूँ,
तू लगती है माशाअल्ला।
काले घने जब केश तेरे,
बन बादल घिर आते हैं,
लगता जैसे सावन आया,
तू लगती है माशाअल्ला।
माथे मुख पे श्रृंगार तेरा,
आभा एक झलकती है,
हो मंत्रमुग्ध मैं बस देखूं,
तू लगती है माशाअल्ला।
हाथ में जो कंगन डाले,
खन-खन खनक जाते हैं,
अंतर्मन मधुर ध्वनी चहके,
तू लगती है माशाअल्ला।
सौंदर्य से भी कुछ ज्यादा,
है मन में मेरे अक्स तेरा,
बंद आँखों से दिख जाता है,
तू लगती है माशाअल्ला।।
