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पगली की याद

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क्या तुमने मुझको याद किया,
जब तूने मुझसे पुछा उस दिन,
क्यों बोलूं झूठ, न याद किया,
पगली याद करूँ गर भूलूँ मैं।

बात कभी अब तुम न करते,
लगता है मुझसे ऊब गए हो,
ऊबने की बात है कहाँ से आई,
पगली दिलचस्पी पूरी ले तो लूँ।

मिलने को बुलाती, तुम न आते,
हर पल बस दूर ही भागे जाते,
अपनी दूरी कैसे बढ़ सकती है,
पगली पास तो पूरा आ जाऊं।

सुनते ही नहीं, मैं बड़-२ करती,
बिलकुल भी मुझपे ध्यान नहीं,
अरे सोचूँ मैं कुछ और तो तब,
पगली ध्यान से पहले हटे तो तू।

सजके सँवरके आई थी मैं,
एक स्वर भी प्रशंसा नहीं करी,
कितनी मैं करूँ तारीफ तेरी,
पगली हर रोज परी है लगती तू।

व्रत था तुम्हारे लिए रखना,
डांट के तुमने मना किया क्यों,
तू सुनती मेरी क्या डांट बिना,
पगली तुझे भूखा कैसे देख सकूँ।

क्या तुमने मुझको याद किया,
जब तूने मुझसे पुछा उस दिन,
क्यों बोलूं झूठ, न याद किया,
पगली याद करूँ गर भूलूँ मैं।।

Written by arpitgarg

September 25, 2014 at 10:41 pm

Posted in Hindi, Love, Poetry

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2 Responses

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  1. वाह।

    Author's avatar

    DilSe

    October 1, 2014 at 1:03 am


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