ArpitGarg's Weblog

An opinion of the world around me

Posts Tagged ‘kal

ऐसा कोई पल

leave a comment »

उसने मुझसे पूछा, बता ऐ साथी,
जो तू न भूला, ऐसा कोई पल,
जिस लम्हे की याद तुझे है आती,
उस हसीन राह तू ज़रा चल|

मैं सोच में पड़ा, क्या कहूं,
कहाँ से दूं, उत्तर मैं तुझे,
ज़िन्दगी टटोलूं, कभी झांकूं,
पर वो पल, न मिले मुझे|

आश्चर्य की है बात, हर दिन,
हम जीतें हैं पल कुछ हज़ार,
पर जब कोई कहता है गिन,
बेबस हो जाते, लगते लाचार|

असल में जीवन काटते बस,
पर जीते कभी नहीं हैं हम,
हँसते हैं, जब कोई बोलता हँस,
चाय पीते, वो भी चीनी कम|

मैंने कभी नहीं सहेजे वो पल,
कभी रूककर उन्हें नहीं पकड़ा,
सोचूँ कल, आज और कल,
मजबूरियां ने मुझे था जकड़ा|

इसी तरह जिए, इसी तरह जायेंगे,
न होंगी अपनी दो-चार यादें भी,
सपने भी नहीं अच्छे कभी आयेंगे,
जिंदगी बस उम्मीद के भरोसे की|

शायद तू ही है साकी, जिसका,
था इंतज़ार मैंने किया अबतक,
मुझे नहीं मालूम, पता उसका,
पर यादों को रोकूँ कबतक||

Written by arpitgarg

December 14, 2013 at 3:34 am

Posted in Hindi, Poetry

Tagged with , , , , , , ,

अध्याय

leave a comment »

गूँज उठी आवाज मेरी,

पसरा सन्नाटा था,

खाली मकान हुआ वो,

घर था मेरा जो कभी।

 

एक एक कर चुना था सब,

एक पल में सब छूट गया,

मुहँ से शब्द न निकले,

गले तक आकर थम गए।

 

वो बस ठहराव न था,

जीवन का था एक अध्याय,

सुहानी यादें, खुशनुमा पल,

आज था जो, बन गया कल।

 

कुछ और भी था जो छोड़ा था,

दूर अपने से उसको किया,

जीवन इतना कठिन होगा,

सोचा न था मैंने कभी।

 

थोड़े दिन की बात है ये,

फिर से कमल खिल जाएगा,

राहें मंजिल को पहुंचेंगी,

मौसम जब रंग बदल लेगा।

 

बस तब तक न भूलना होगा,

लक्ष्य पर रखनी होगी नज़र,

जिस कारण से विरह चुनी हमनें,

उसको सार्थक करना होगा।।

Written by arpitgarg

December 3, 2012 at 4:26 pm

Posted in Poetry

Tagged with , , , ,