ArpitGarg's Weblog

An opinion of the world around me

Posts Tagged ‘kid

हकीकत

leave a comment »

दिल क्यों रो रहा है, मुझे नहीं पता। पसीज उठा हूँ मैं आज, न मालूम क्या करूँ। भाग जाऊं यहाँ से या सामना करूँ। यह हकीकत है जो भयानक रूप धारण कर मेरे सामने प्रकट हुई है।

यह रेलवे स्टेशन का दृश्य है। दिसम्बर की सर्दी भरी रात है। सुबह के चार बजे हैं। मैं इंजन की तरफ पीठ करके बैठा हूँ। पीछे से काफी शोर आ रहा है। वैसे तो कड़ाके की ठंड है, पर अचानक ही मुझे गर्मी लग उठी है। एक हाफ-स्वेटर में मुझे टनों ऊन की सी तपन महसूस हो रही है।

कारण? कारण है मुझे अपने सामने दिखती दरिद्रता जो नग्न्ता पर मजबूर हो रही है। एक छोटी बच्ची फूलों की सेज पर सोने के बजाए नंगे फर्श, पर गत्ते के डिब्बे का बिस्तर बनाये सो रही है। तन पर कोई गर्म वस्त्र नहीं, ओढे हुए है तो सिर्फ मोमजामा।

उसके सामने मैं खुद को गर्म चादर ओढे पाता हूँ। जो ठंड मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी, अब महसूस ही नहीं हो रही। क्या यही हक़ीक़त का असर है? क्या है उस नन्ही सी गुड़िया का भविष्य? दूसरी तरफ मैं अपने आप को देखता हूँ। हर्षोल्लास करते हुए। मजे करते हुए। यह उचित है या अनुचित, मुझे नहीं पता। पर क्या हमें अपने आप से यह सवाल नहीं करना चाहिए, ऐसा क्यों?

क्या वह बच्ची भगवान की देन नहीं? क्या हम और वो बराबर नहीं? क्या हम एक ही मालिक की औलाद नहीं? मुझे पता है कि आप में से कुछ मुझ पर हँसेंगे। सोचेंगे नहीं। क्योंकि अभी तक आपने हकीकत को देखा तो है, पहचाना नहीं।

कृपया हक़ीक़त को जानें और आगे बढ़ें ताकि इस धरती पर से दुःख और दर्द मिट जाएँ और कुछ ऐसा समां बने जो हकीकत को सुनहरा बना दे।

Written by arpitgarg

March 28, 2008 at 11:28 am

%d bloggers like this: