ArpitGarg's Weblog

An opinion of the world around me

रैगिंग

with 2 comments

बड़े जोश से चले निकल के,
नन्हे माँ के लाल रे|
मन में जैसे उछल रहे थे,
बन्दर डाल डाल रे||

स्कूल से जाना था कॉलेज,
फुदक रही थी चाल रे|
हृदय में थी नयी उमंगें,
खोजेंगे जल ताल रे||

कॉलेज का था एक हॉस्टल,
कमरे थे बेहाल रे|
देख उनको बुद्धि ठनकी,
आया घर का ख्याल रे||

घूर रहे थे सभी सीनिअर,
होठ थे उनके लाल रे|
सोच रहे थे आया मुर्गा,
रैगिंग ले ही डाल रे||

पुछा नाम पता frequency,
हुए शर्म से ला रे|
पकड़ के ले गए नाई के,
कटवाए हमारे बाल रे||

फिर चला चल चित्र का दौर,
इज्जत ली निकाल रे|
Superman हमें बनाया,
He-man बनकर किया धमाल रे||

गर्ल्स हॉस्टल के चक्कर लगवाए,
क्या क्या सवाल न हमसे पुछवाये|

चवन्नी अठन्नी थी हमने निकाली,
हस हस के बेहाल रे|
दुपक रहे थे हम कमरों में,
सीना अन्दर दाल रे||

धीरे धीरे थी बात खुली,
पूरी तस्वीर थी साफ़ धुली,
वो तो सिर्फ एक मुखौटा था,
सच्चाई से कुछ छोटा था||

पूरा परिदृश्य ही बदल गया,
हॉस्टल लगने लगा नया,
सब सीनिअर अपने दोस्त बने,
साथ में मौज मस्ती करे,
P.D.P तो एक बहाना था,
सबको नजदीक जो आना था||

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Written by arpitgarg

May 13, 2010 at 12:23 pm

2 Responses

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  1. Nice one ….

    Alok

    May 13, 2010 at 12:42 pm


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