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हुआ मनुष्य लाचार क्यों आखिर
डरता हूँ मैं, डरता क्यों हूँ?
हर पल मैं आखिर मरता क्यों हूँ?
ऐसी कौन सी गली मैं मुडा,
राह सभी बे-राह हुई जो|
पीता जब हूँ, रब दिखता है,
परदे के पीछे सब दिखता है,
काल-चक्र का उल्टा चलता,
सभी सफलता, लगी विफलता|
डर-डर के जीवन, जीता हूँ में,
गम का सागर पीता हूँ में,
इस माहौल में और नहीं अब,
“एक दिन आएगा”, आएगा कब?
रो-रो के जीवन, जहन न होती,
दर-दर की ठोकर, सहन न होती,
हूँ मैं बेबस, जज्बात लदे हैं,
कुछ कर जाता, हाथ बंधे हैं|
हुआ ये कैसे, मनुष्य लाचार
मुझे पता ना, पता है तुमको?
