ArpitGarg's Weblog

An opinion of the world around me

Posts Tagged ‘apart

कोई आस है वापस आने की

with 3 comments

hope.jpg

एक दर्द दबाए बैठा हूँ,
सीने में चुभन सी होती है,
दूर तेरे चले जाने की,
कोई आस है वापस आने की?

एक तूफ़ान समाये बैठा हूँ,
मन में उफ़न सी होती है,
श्रृंगार की बेला जाने की,
कोई आस है वापस आने की?

एक राज छुपाए बैठा हूँ,
ओठों पे कशिश सी होती है,
क्षितिज पार न देख पाने की,
कोई आस है वापस आने की?

एक आह समेटे बैठा हूँ,
आँखों में टीस सी होती है,
झर-झर मोती बह जाने की,
कोई आस है वापस आने की?

एक स्वप्न संजोए बैठा हूँ,
रातों को करवटें होती हैं,
नींद मेरी खुल जाने की,
कोई आस है वापस आने की?

एक आग लगाए बैठा हूँ,
हर अंग तपन सी होती है,
भस्म इसमें हो जाने की,
कोई आस है वापस आने की?

एक सांस को थामे बैठा हूँ,
भीतर से घुटन सी होती है,
ईश्वर से जा मिल जाने की,
कोई आस है वापस आने की?

Advertisements

Written by arpitgarg

April 26, 2016 at 10:12 am

Posted in Hindi, Love, Poetry

Tagged with , , , ,

जबसे गयी हो दूर

leave a comment »

जबसे गयी हो तुम दूर, एक दर्द सा होता है,
होता है क्यों दर्द ये, है मुझे मालूम नहीं,
मालूम मुझे बस इतना है, कि नींद मुझे न आती है,
नींद कभी जो आ जाए, सपनों में याद सताती है||
 
दिन कटते हैं जैसे तैसे, रात काटने को आती,
कैसे काटूं रात ये दिन, मुझे समझ न आता है,
समझदार मैं था तो बहुत, पगला मैं बन बैठा हूँ,
बैठे बैठे, बस सोचूँ ये, किस्मत से मैं क्यों ऐंठा हूँ||
 
वो रास्ते, वो गलियाँ, जिनपर चलते थे हम तुम,
चलना भी दुष्वार हुआ, छाले क़दमों पे पड़ते हैं,
कदम मुझे ले जाते हैं, तेरे दरवाज़े की ओर,
दरवाज़े बंद पड़ जाते हैं, बिन तेरे किस्मत के||
 
तू जब थी बेहोश, वो पल लम्बे थे जीवन के,
एक बेचैनी छाई थी, तड़प रहा था मन ही मन,
तुझे कभी जो दर्द हुआ, चुभन मुझे महसूस हुई,
कब जाने ऐसा होने लगा, मुझसे पहले तू आने लगी||
 
वापस आजा जान तू अब, विरह सहन न होती है,
सहन जाऊंगा दुत्कार तेरी, पास जो तू मेरे होगी,
पास नहीं जो मेरे तू, जीवन जीने की आस नहीं,
इसी आस में बैठा हूँ, की आने वाली तू जल्दी है||

Written by arpitgarg

January 17, 2012 at 9:29 pm

Posted in Hindi, Love, Poetry

Tagged with , , , , , , ,

%d bloggers like this: