ArpitGarg's Weblog

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Lovey Dovey

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O Princess, O Sweetheart,
My apple pie, my lemon tart,
Google you, I’m feeling lucky,
You are my Lovey Dovey.

Your hairfall, Your confusion,
Is no temporary but all season,
You are tea leaf, I am plucky,
You are my Lovey Dovey.

Your shyness, Your red cheeks,
All flat, What Macho, What Geeks,
Movie You, I Vicco Vajradanti,
You are my Lovey Dovey.

You wake up, its my sunshine,
When off you doze, its my night,
I’m like a cold, You Vicks Vaporab,
You are my Lovey Dovey.

So slim are you, still worry weight,
Let me have last bite off the plate,
I stain yellow, You White of Tide,
You are my Lovey Dovey.

Your anger makes me laugh,
Never full, all half and half,
I melody, you are chocolaty,
You are my Lovey Dovey.

Romeo Juliet died together,
People say they love eternal,
But I want to live with you coz,
You are my Lovey Dovey.

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Written by arpitgarg

March 5, 2015 at 8:00 am

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A Romantic Evening

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Someone asked me recently about how I would treat my loved one to a romantic evening. Here’s how it pans out. I’ll start with Don’ts and move towards Do’s.

A five star, candle light, and by the pool dinner is a big No-No for me. A romantic evening with my loved one can’t be at a public place. I won’t be comfortable enough to make the evening romantic. Sitting by the rocks at Band-stand or soaking in the wind at Marine drive are okay, but not exactly there for me.

My Do’s starts from a private setting, my home. I would start by cooking the food of her liking, by myself. Might not be the perfect definition of taste, but with a lots of love. A candle light setting on a low table with couple of bean bags on the floor.

The room should be lit by few candles along the wall. When the bell rings, the living room, dimly lit leaves a lot for her to guess, and not much revealed. Red roses carefully chosen, laid across the room. She will take some time to recognize their presence and that’s the essence of it.

Nice romantic melodies chosen for the occasion should be playing at a low tone on the laptop in some corner. Loud enough to hear the humming and low enough not to become a distraction. This sets the mood going.

Starters, Drinks, Food should have been prepared in advance and be kept handy. I don’t want to get up again and again to destroy the mood. It should be kept within arms distance. I’ll be the server and my hands the one to feed her.

The talks, I will leave to chance, for them to be free flowing. We’ll sit there relaxed on bean bags, with food around in a dimly candle-lit room, with roses scattered on the floor; And let the evening unwind.

Written by arpitgarg

January 19, 2014 at 10:00 pm

Posted in Love

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ठर्कीपन

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बात है उस दिन की, पैदा हुआ था मैं,
सफ़ेद लिबास में पुचकार रही थी वो,
उम्र न देखी, वक़्त न देखा, बस ली फिर्की,
नर्स को ही देखकर हो गया मैं ठर्की|

नर्सरी क्लास का है किस्सा यह,
आगे की कुर्सी पे बैठी थी वो,
खींच दी आहिस्ता से चोटी उसकी,
उसकी नन्ही जुल्फों में उलझा ये ठर्की|

चौथी कक्षा की टीचर जी,
हर बच्चा उन पे मरता था,
कितनों से लड़ा, कितनी तोड़ी बत्तीसी,
ब्लैक बोर्ड की लिखाई ने कर दिया ठर्की|

स्कूल के मास्टर की कोचिंग जाता था,
कुछ अपनापन था वहां, दिल को भाता था,
नंबर अब जो भी दे वो, बेटी भा गयी मास्टर की,
फेल और पास क्या जाने, यह मन तो है ठर्की|

बचपन का दोस्त था जो, एक दिन बोला वो,
नीले दुपट्टे में आई है जो, दिल ले गयी मेरा,
कहने को भाभी होनी थी, पर मर्जी इश्वर की,
समझा लूँगा दोस्त को मैं, न समझे ये दिल ठर्की|

कम्पटीशन का पेपर देने बैठा था, आर या पार,
दो सीट आगे बैठी थी, दिल हुआ बेकरार,
सलेक्श हो जाएगा अगले साल सही,
आज जी भर के देखूं उसको, हो कर ठर्की|

ऑफिस में तो सुधर जा अब, सीधा बन,
शिकायत करेगी, जायेगी नौकरी, होगी कुर्की,
जान दे, दूसरी मिल ही जायेगी नौकरी तो,
आज रोका तो बुरा मान जाएगा दिल ठर्की|

बचपन में सीखा था मैंने,
कैसा भूल गया यह ज्ञान,
अब ना भूलूंगा जीवन भर,
हर दिन जाप करूंगा, जी कर, मर कर|

इश्क में पड़ेगा तो जान से जाएगा,
ऐसा घुसेगा, पानी नहीं पायेगा,
जूतों से पिटवाएगी यह लड़की,
नज़र रख सीधी, मत बन ठर्की||

नन्ही परी, चंचलता भरी

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एक थी चुलबुल नन्ही सी परी,
चंचलता, चपलता, शरारत भरी,
मुस्कान से उसकी, रोशन था ज़माना,
पड़े सब पीछे, उसको था फंसाना|

आया एक राजकुमार तभी,
सबसे लड़ा और उसे ले उड़ा,
आह भरी, देखते रह गए सभी,
आसां न था, युद्ध हुआ था कड़ा|

पर किस्मत को था मंज़ूर नहीं,
नज़र लगी उसको जमाने की,
अभिमन्यु का भी चक्रव्यूह क्या होगा,
फंसी वो बेचारी जान थी जिसमें|

आंसू न बहा तू, आंसू का मोल है तेरे,
खुशियाँ हैं तेरी, सब गम हैं मेरे,
वक़्त बुरा ना रहता, चला जाता है,
तेरा यह उदास मुख, पर नहीं भाता है|

चहकती महकती सी गुड़िया जो है तू,
चहकती महकती सी गुड़िया ही रह तू,
चहकना महकना ही भाता ही तुझको,
चहकना तेरा, महकाता है सबको|

ठहराव थोड़ा बस आता है,
रुकती नहीं है चाल,
भूल के तू सबकुछ,
मचा वही पुराना धमाल|

कुछ होते हैं सच्चे, कुछ होते हैं कच्चे,
पर कुछ तुझ जैसे, बस होते हैं अच्छे,
आंसू न बहा तू, आंसू का मोल है तेरे,
खुशियाँ हैं तेरी, सब गम हैं मेरे|

Written by arpitgarg

March 26, 2011 at 6:34 pm

शादी मुबारक हो दोस्त!

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बात उन दिनों की है,
जब बेफिक्री का आलम था,
फ़ालतू थे, वक़्त नहीं कम था,
संग में छड़ी थी वो सीड़ियाँ,
संग में लिया था पहला कदम|
 
वो पहला कश, वो पहला जाम,
वो चुराया हुआ पल, वो अधूरा काम,
संग में छेड़ी थी कुडियां,
संग में डाला था दाना,
वो देना सफायियाँ, नया बहाना|
 
हर दिन नयी कसम,
बस आज से पढ़ेंगे,
नया अध्याय, शुरू करेंगे,
और वही हर बार का काम,
दिन को लुक्खागिरी, रात को जाम|
 
वो संपादकीय लेख,
वो अपनी धौंस जमाना,
देख लेंगे साले को, अगला लेख उस पे,
पता नहीं है पंगा लिया है किस से,
साथ-साथ थे, इसलिए सब कर गए,
वरना यही कहते कि, ‘… लग गए’|
 
वो पालतू बिल्ली जो थी,
आज भी याद आती है,
बिलोंटा देखते ही,
उसकी चीख निकल जाती थी|
 
संग में मिलकर दुनिया को गालियाँ दी,
अलग-अलग शहर चले गए,
नज़र लग गयी उसी ज़माने की|
 
तू अब नयी ज़िन्दगी शुरू करने जा रहा है,
बहुत खुश हूँ दोस्त तेरे लिए,
तू सलामत रहे यही दुआ करूंगा,
क्यूंकि करता हूँ में खुद से भी बहुत प्यार, 
मेरी उम्र तुझे लग जाए, यह नहीं कहूँगा|
 
तेरी होनी वाली जीवन साथी से,
तुझे मिले अपार प्रेम,
जब कभी तेरे घर आऊँ,
वैसे तो दोस्तों से कम ही मिल पाते हैं,
एक कप चाय पिला दे भाभी बस,
यह ना कहे, “कैसे-कैसे दोस्त आ जाते हैं”?

पहला प्यार

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क्या हुआ है दिल को आज,
इसने बजाया है वही पुराना साज,
जब हमने पहली बार किसी को था दिल दिया,
पर हाय री बेवफ़ा, उसने हमें शायर बना दिया|
 
प्रेम के प्रकाश से हमारी आँखें थीं चुंधियाई,
इसी जूनून ने हमारी आखरी सांसें थीं निकलवाईं,
उसकी हिरनी जैसी चाल पर थे हम मिटे हुए,
उसकी कातिल मुस्कान पर थे हम फ़िदा हुए|

सुबह-शाम उसके घर के चक्कर हम लगा रहे थे,
लग रहा था उसको भी हम कुछ-कुछ भा रहे थे,
भूख को हमारी उसकी जालिम अदाओं ने था मार डाला,
हमारी नींद का तो उसने जनाजा ही था निकला|

न दिन को चैन, न रातों को आराम,
हमारी जिंदगी तो उसने कर दी थी हराम,
बॉस से झिक झिक, घरवालों की उलाहना,
उसकी मोहब्बत में हम थे हद से गुजर जाना,

आखिर हमने कर ही डाला प्रेम का इजहार,
बदले में उसकी लानतों का मिला हमको हार,
उसकी शादी पहले ही तय हो चुकी थी किसीसे,
हमारा दिल न हो सका संतुष्ट बस इसीसे|

उसेक गम में जाम उठाया, बन गए देवदास,
जीवन जीने की हमारी खो गयी थी आस,
हम तो बस रह गए थे सबके लिए उपहास|

फिर हम झूमे नाचे, किया खूब डांस,
एक परी को दिल दिया, शुरू हुआ रोमांस,
उमंग वापस आई हैं, जिंदगी लाया हूँ मैं बुला,
पर पहले प्यार की याद को क्या मैं सकूंगा भुला?

Written by arpitgarg

January 5, 2011 at 5:28 pm

Dear Rose

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Leaving thy, with a sigh!
Back will I, don’t cry,
Task this, must I pursue,
Let me go, O! wonderful you.
I ask you this, not for me wait,
To start a new life don’t hesitate,
My heartly blessings are with you,
My dear Rose whatever you do.

Dumbstruck was she to this,
Hinting something was amiss,
Replied she with deepset grief,
Don’t worry, I would be brief.
Leave you! I would not budge,
There is task you must indulge,
Understand this me enough.
But how could you say my dear love,
That I should find a new partner,
This was a dagger that you just utter,
I would be waiting till the end of time,
Uptill I be far past my prime,
You would find me when you come,
Just your Rose and not else some,
So go away just don’t worry,
If I were rude, can I just say…Sorry.

Written by arpitgarg

March 9, 2010 at 1:52 pm

Posted in Literary, Love

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