Archive for the ‘Poetry’ Category
चुनावी दंगल
आया है फिर से महाकुम्भ
चिंघाड़ उठी, लो भरा दंभ
सारे मिलकर जिसे खेले हैं
इसे चुनाव प्रक्रिया बोले हैं|
चुनाव आयोग है इसका अंपायर
फुस्स है एकदम, जैसे फटा टायर
घुड़की देने में उस्तादी है
पर गरजने वाले बरसे हैं कभी|
कई दल इस दंगल में खेले हैं
सब इसी दल-दल के मैले हैं
सब बजाते अपनी शहनाई हैं
पांच साल बाद आम आदमी की रौनक छायी है|
पैसे, कपडे, साईकल, टीवी
सब बटते हैं इस हुज्जुम में
एक-एक वोट पे न्योछावर
सौ- सौ के नोट की गड्डी है|
सभी प्रकार के अपराधी
अभी जेल से छूटे हैं
सब वोट मांगने निकले हैं
पर जो खुद ही है कंगाल
वो वोट के सिवा देगा भी क्या|
चोर-उच्चके, खूनी-कातिल
बस इनकी ही सुनवाई है
यह बन जो गए अपने नेता
बस राम तेरी ही दुहाई है|
एक तरफ है कठपुतली
एक तरफ खड़ा बुजुर्ग सिपाही है
दोनों में से किसको चुनू
यह असमंजस होता तो अच्छा था
पर हाय रे में तो सोचूँ हूँ
इसको भी नहीं, उसको भी नहीं|
इसी बात की आस है बस
कि कुछ ऐसा हो, जो सच्चा हो
और पांच साल के बाद नहीं
आम आदमी का हर दिन अच्छा हो|
फिर वो पुरानी याद आई
क्यों रह रह कर आते सपने,
उन पीर परायी रातों के,
क्यों होती है दिल में हलचल,
उन नई पुरानी बातों से,
क्यों जहन में अटकी हैं यादें,
जब गलियों की कच्ची सड़कें,
सावन में पक्की लगती थीं,
जब टूटी सायिकल की गद्दी,
मोटर से मुलायम लगती थी,
जब आंच पे पकती रोटी भी,
जायके में अव्वल लगती थी,
क्या दौर था वो, कुछ और था वो,
सुख चैन का बस सिरमौर था जो,
वो समां पुराना चला गया,
कुछ और देर तक रहता फिर,
मिल बैठ के बातें करते हम,
कोई रीत पुरानी गाता में,
कुछ गम मिल जुलकर करते कम|
मैदान में वो गिरना पड़ना,
हर बात पे बालक हठ करना,
जो हवा बनाई डींगे हांक,
सब अव्वल बैटिंग देते थे,
जो आड़े आया कोई सो,
अपने सुदबुध में ऐंठे थे,
जो पेड़ सुनहरा गुलमोहरी,
दिनभर हरिया बरसाता था,
वोह बेल हवा में टूट टूट,
और नीम का मस्ती लहराना,
क्या दौर था वो, कुछ और था वो,
सुख चैन का बस सिरमौर था जो,
वो समां पुराना चला गया,
कुछ और देर तक रहता फिर,
मिल बैठ के बातें करते हम,
कोई रीत पुरानी गाता में,
कुछ गम मिल जुलकर करते कम|
शादी का मौसम सुनते ही,
मुहँ में पानी का आ जाना,
ख्वाब में भी खुरचन लड्डू की,
आपस में कुश्ती करवाना,
और कचौड़ी पूड़ी से,
घी का टप टप रिसते जाना,
और नहीं, बस और नहीं,
एक और तो लो, तुम्हें मेरी कसम,
भाभी देवर का टकराना,
क्या दौर था वो, कुछ और था वो,
सुख चैन का बस सिरमौर था जो,
वो समां पुराना चला गया,
कुछ और देर तक रहता फिर,
मिल बैठ के बातें करते हम,
कोई रीत पुरानी गाता में,
कुछ गम मिल जुलकर करते कम|
बीमार था जब, सब याद है अब,
दादी ने नजर उतारी थी,
अलाएँ बालाएं सब टल जाएँ,
इस बात की दुआ पुकारी थी,
दीवाली में पूरे कुनबे का,
मिल जुलकर बाड़ा चमकाना,
कुछ दीपक से, कुछ बत्ती से,
सब ओर प्रकाश का टिम टाना,
सब बच्चों को नगदी मिलना,
बड़ों का आशीर्वाद कहलाता था,
एक सुई, एक धागे में,
सारा संसार पिर जाता था,
क्या दौर था वो, कुछ और था वो,
सुख चैन का बस सिरमौर था जो,
वो समां पुराना चला गया,
कुछ और देर तक रहता फिर,
मिल बैठ के बातें करते हम,
कोई रीत पुरानी गाता में,
कुछ गम मिल जुलकर करते कम|
हो गई पुरानी सब बातें,
यादें भी धुंधली हो हैं चली,
पर मन जाने क्यों अटका है,
कभी ना जाना, उसी गली,
कभी कभी एक आस जगे,
क्यों ना कल जब सो के उठें,
तो सुबह उन्हीं गलियों में हो,
रात उन्हीं अठखलियों से हो,
पर बीत चुका कब आया है,
बीते की याद ही आई है,
क्या दौर था वो, कुछ और था वो,
सुख चैन का बस सिरमौर था जो,
वो समां पुराना चला गया,
कुछ और देर तक रहता फिर,
मिल बैठ के बातें करते हम,
कोई रीत पुरानी गाता में,
कुछ गम मिल जुलकर करते कम|
भूली बिसरी यादें
कहाँ-कहाँ से पकड़ से लाये,
कैसे करतब करवाने को|
बंद कर दिए एक पिंजरे मैं,
आपस मैं खोपड़ टकराने को|
तीन मोर और दो थी मोरनी,
नई-नई पहचान हुई|
पग-पग कर थी राह जोड़नी,
कच्चा था धागा टूटी थी सुई|
प्यार था उमड़ा जिन बातों पर,
वो बातें कड़वी याद हुईं|
एक हाथ से ताली नहीं बजती,
कहावत ये साकार हुई|
मोर-मोरनी लड़े औ झगडे,
अपनों का नाम खराब किया|
होते हैं जीवन में लाखों लफड़े,
पर हाय ये विष क्यों सबने पिया|
नजरें मिला पाओगे अब तुम,
दर्पण मैं अपने आप से क्या|
गिर कर भी उठ पाओगे क्या,
नजरों मैं अपने आप के तुम|
भगवान् इन्हें सदबुद्धि देना,
आगें करतब कुछ ऐसा करें|
सब देखें और गुणगान करें,
कि मोर-मोरनी हों तो ऐसे,
और सभी का ये सम्मान करें|
Good Morning Mumbai…
Every time I read this, I feel relieved. Wonderful dialogue.
Good Moooorrrninggggg!! Mumbai!
This is Jhanvi on World Space Radio
जाने से पहले ये है मेरा आज का ख्याल,
उन सब के लिए जो दौड़े जा रहे हैं शहर में|
शहर की इस दौड़ में दौड़ के करना क्या है?
गर यही जीना है दोस्तों, तो फिर मरना क्या है?
पहली बारिश में ट्रेन लेट होने की फ़िक्र है,
भूल गए भीगते हुए टहलना क्या है?
सिरिअल्स के किरदारों का सारा हाल है मालूम,
पर माँ का हाल पूछने की फुर्सत कहाँ है?
अब रेत पे नंगे पाँव टहलते क्यूँ नही?
१०८ है चैनल, पर दिल बहलते क्यूँ नही?
इंटरनेट पे दुनिया से तो टच में हैं,
लेकिन पड़ोस में कौन रहता है, जानते तक नही|
मोबाइल, लैंडलाइन, सब की भरमार है,
लेकिन जिगरी दोस्त तक पहुंचे, ऐसे तार कहाँ है?
कब डूबते हुए सूरज को देखा था, याद है?
कब जाना था शाम का गुज़रना क्या है?
तो दोस्तों शहर की इस दौड़ में दौड़ के करना क्या है|
गर यही जीना है, तो फिर मरना क्या है?
So good bye Mumbai. मेरा bye-bye बोलने का वक़्त आ गया है
उम्मीद है आप से कल फिर मुलाकात होगी
यहीं पर, इसी समय,
Friends till then don’t worry, be happy, saionara!
और हाँ! याद रखना कल दो अक्टूबर है
And we are having Mahatma quiz contest
जो भी ये quiz जीतेगा, वो होगा मेरा special guest
Yes! उसे में studio में invite करूंगी और उससे करूंगी ढेर सारी बातें
So bye bye and dont forget to tune in tomorrow at 9
Munna ki Shaadi
Everyone has some childhood memory which tend to bring smiles. For me it would be “childhood rhymes”. One which I sang the most, enjoyed the most is the, “Munna ki Shaadi”. Try singing it fast, would enjoy better. Also if you can couple it with claps, pleasure would be supreme.

सायोनारा: अलविदा सैंट पीटर्स
My farewell speech 12 Std, St. Peters College Agra, 2003.
कुछ बीती बातों का छोड़ रहा हूँ फव्वारा,
सायोनारा|
दिल कि डायरी का है यह सार सारा,
सायोनारा|
इस कविता में अपनी पहचान ख़ुद से है करारा यह बेचारा,
सायोनारा|
सुबह घंटी बजने के ५ मिनट बाद नियमपूर्वक क्लास में है आरा,
सायोनारा|
बिना पास के साइकिल स्टैंड वाले को दस रुपये का किया इशारा,
सायोनारा|
बिन पॉलिश के जूतों और लंबे बालों को लिए क्लास में है घुसा जारा,
सायोनारा|
डायरी न लाने पर एक दोस्त के कवर व बाकी से पन्ने लेकर असेम्बली में जाने की जुगाड़ है बिठारा,
सायोनारा|
एडवर्ड सर की नजरों से बचने के लिए गंदे जूते पैंट से है घिसे जारा,
सायोनारा|
छोटे कद का होकर भी असेम्बली की लाइन में सबसे पीछे है लगा जारा,
सायोनारा|
प्रयेर के टाइम पे गर्लफ्रैंड के किस्से है सुनारा,
सायोनारा|
नेशनल ऐनथम के दौरान अटेंशन में नहीं खड़ा हुआ जारा,
सायोनारा|
‘गुड मोर्निंग टीचर’ को के.एल. सहगल के गीत की तरह है सुनारा,
सायोनारा|
पहले ही पिरिएड में टिफिन का लिया चटकारा,
सायोनारा|
चुपके से दूसरे कि बोतल से पानी है पिया जारा,
सायोनारा|
लीव ऐप्लीकेशन न लाने पर जल्दी से मम्मी-पापा का साइन है किया जारा,
सायोनारा|
बिना सिलेबस कि किताबों के भी नोविल्स के बोझ से बैग है फटा जारा,
सायोनारा|
बोरिंग लेक्चर के बीच नींद में डूबा जारा और पकड़े जाने पर घिसा पिटा राग सुनारा,
सायोनारा|
मॉरल साइंस के पिरिएड में फादर के संग ठहाके है लगारा,
सायोनारा|
इंगलिश के पिरिएड में में मैथ का काम है किया जारा,
सायोनारा|
मैथ का पिरिएड आने पर सिस्टर ऑफिस भागा जारा,
सायोनारा|
एग्जाम से पहले बैठकर महनत से फर्रे है बनारा,
सायोनारा|
टीचर के सिर को एरोप्लेन की लैंडिंग प्लेस है बनारा,
सायोनारा|
चुन-चुन कर दूसरों पे रबड़ में फंसाकर बुलेट है बर्सारा,
सायोनारा|
पंखे, ट्यूबलाईट और, बल्ब को चॉक का निशाना है बनारा,
सायोनारा|
तबियत ख़राब होने का बहाना बनाकर घर को भगा जारा,
सायोनारा|
फ़ुटबाल मैच में सामने वाले को धक्का देकर गिरारा और ख़ुद गिरने पर बाहर मिलने का न्योता देकर आरा,
सायोनारा|
जूनियर साइड में नल की लाइन पर जाकर छोटे बच्चों को है हड़कारा,
सायोनारा|
इंटरवल की घंटी बजने पर खिड़की से है कूदा जारा,
सायोनारा|
कैंटीन में ५ रुपये में दो पैटी लेकर अपनी बुद्धि को है इतरारा,
सायोनारा|
औरों की बर्थडे की ट्रीट खाकर अपनी बर्थडे के दिन स्कूल में न दिया नज़ारा,
सायोनारा|
एब्सेंट होने पर रोज नया बहाना बनरा,
सायोनारा|
कैंटीन की भीड़ में अपनी शक्ति का पूरा जोर दिखारा,
सायोनारा|
दूसरे के बर्गर के चिथड़े कर फूले नहीं समारा,
सायोनारा|
दो दोस्तों के बीच डब्लू.डब्लू.एफ करवाकर मंद-मंद मुस्करारा,
सायोनारा|
क्लास से बंक मारकर पूरे स्कूल में गश्त है लगारा,
सायोनारा|
पीछे बैठकर दोस्तों से गप्पें है लडारा,
सायोनारा|
एग्जाम में आगे वाले को आन्सर बताने के लिए पटारा और न बताने पर उसे भूखे शेर कि तरह है घूरे जारा,
सायोनारा|
केमिस्ट्री लैब में नाइट्रिक एसिड से घर की टकसाल के सारे सिक्के है चमकारा,
सायोनारा|
विभिन्न रसायनों को मिला सतरंगी चित्र है बनारा,
सायोनारा|
५ टी.टी और दो बीकर तोड़ने की गाथा गर्व से पूरी क्लास को है सुनारा,
सायोनारा|
फिजिक्स लैब में मरकरी कि गोलियाँ है बनरा,
सायोनारा|
वहाँ के इन्सटरूमंट्स तोड़कर, उनके पहले से टूटे होने कि ख़बर सच्चाई से टीचर को है सुनारा,
सायोनारा|
प्रोजक्ट टाइप करने के बहाने पूरा दिन कमप्यूटर लैब में ऐ.सी. के मजे है उड़ारा,
सायोनारा|
मक्खन लगाकर सब टीचर्स का बनना चाह रहा दुलारा और दूसरों के मक्खन लगाने को सहन नहीं कर पारा,
सायोनारा|
स्पोर्ट्स डे की शाम कॉरिडोर में बम्ब है छुड़ारा,
सायोनारा|
और भड़ाम की आवाज आने पर सीना फूलकर दुगना हुआ जारा,
सायोनारा|
एग्जाम टाइम में सब टीचर्स के पैर छूकर जारा,
सायोनारा|
सेकंड क्लास की सीड़ियों से “ग्रेट वाल पार आफ चाइना” के उस पार है झाँका जारा,
सायोनारा|
स्कूल के अन्दर आने के रास्ते में बड़ा गेट आते ही स्पीड धीमी कर मुंडी है घुमारा,
सायोनारा|
कम्बाइंड स्कूल सैलिब्रैशन के लिए १५ अगस्त का इंतज़ार है किया जारा,
सायोनारा|
इन सब को याद कर बड़ी मुश्किल से हूँ में अश्रुधारा को रोक पारा,
सायोनारा|
सैंट पीटर्स के गलियारों में दिल मेरा हारा,
सायोनारा|
यहाँ है सब टीचर्स का स्नेह और फादर मैथ्यू का प्यार बहुत सारा,
सायोनारा|
यहाँ है मानवता का फव्वारा,
सायोनारा|
यह है मार्गदर्शक हमारा,
सायोनारा|
येह है प्यार का गुलिस्तां हमारा,
सायोनारा|
आज इन सब चीजों को कर रहा हूँ में सायोनारा
सायोनारा, सायोनारा, सायोनारा…
…अलविदा सैंट पीटर्स…
इंतज़ार
इस पत्र के पटल पर दिल की इबारत है लिखी,
इसी को मेरा प्रेम पत्र समझना तुम सखी|
दो-चार बार जो तुम मुझसे मिली,
दिल के आँगन में कली नई खिली।
नोट्स के बहाने हुए पहली मुलाक़ात,
उसी पल हमने अपना दिल दिया तुम्हारे हाथ।
चांदी के सिक्कों सा तेरा तन,
तेरी खिलखिलाहट और यह चंचल मन।
मेरे इशारों को तू न समझ पायी,
या मेरे खुदा तेरी दुहाई।
दिल की बात कहने की कच्ची है उमर,
पर जब भी कहूँगा तुझे ही कहूँगा ऐ जानेजिगर बन मेरी हमसफ़र।
इस दिल के बहकाने पर न चलूँगा मैं,
प्यार की कसौटी पर खुद को परखूँगा मैं।
हाय हैलो का यह प्रेम नहीं है,
इससे आगे भी न बढ़ सका यह भी सही है।
जब मैं बन जाऊंगा इस काबिल,
कि सकूँगा तेरा हाथ थाम, तभी समझूंगा तुझे अपनी रंगीन शाम।
बस तब तक मेरा इंतज़ार करना,
वरना …
मिलन
एक अनजान सा वो चेहरा,
जुल्फ तले है घना अँधेरा,
देर रात देता है दस्तक,
नींद में ली अंगड़ाई है,
छाया है मदमस्त हो यौवन,
नयी छठा बिखरी घर आँगन,
पर कौन है वो जो रोक है देता,
मेरा वो साहिल से मिलन,
हुआ है पहले, हो के रहेगा,
इंतज़ार का सिला मिलेगा,
कौनसी होगी ना जाने वो बेला,
जब नैया पर लग जायेगी,
पर है विश्वास इतना बस मुझको,
कि वो मधुर घडी जल्द ही आएगी।
Ek Ehsaas Phir Se
Jab dekha tha use
Kuch hua tha mujhe
Keh nahin sakta kya tha ehsaas
Sab shithil sa ho gaya tha aas paas
Woh ehsaas kuch ajeeb tha
Ek dard sa woh de jo gaya
par lage mujhe kyon pyara woh
bata de koi mujhko
khair mere yaar, mere saathi
jeevan ki is dor mein
aayega phir wohi ehsaas
pehli baar toh maine jaane diya
par abki baar rahoonga mein tyaar.
