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पहला प्यार
क्या हुआ है दिल को आज,
इसने बजाया है वही पुराना साज,
जब हमने पहली बार किसी को था दिल दिया,
पर हाय री बेवफ़ा, उसने हमें शायर बना दिया|
प्रेम के प्रकाश से हमारी आँखें थीं चुंधियाई,
इसी जूनून ने हमारी आखरी सांसें थीं निकलवाईं,
उसकी हिरनी जैसी चाल पर थे हम मिटे हुए,
उसकी कातिल मुस्कान पर थे हम फ़िदा हुए|
सुबह-शाम उसके घर के चक्कर हम लगा रहे थे,
लग रहा था उसको भी हम कुछ-कुछ भा रहे थे,
भूख को हमारी उसकी जालिम अदाओं ने था मार डाला,
हमारी नींद का तो उसने जनाजा ही था निकला|
न दिन को चैन, न रातों को आराम,
हमारी जिंदगी तो उसने कर दी थी हराम,
बॉस से झिक झिक, घरवालों की उलाहना,
उसकी मोहब्बत में हम थे हद से गुजर जाना,
आखिर हमने कर ही डाला प्रेम का इजहार,
बदले में उसकी लानतों का मिला हमको हार,
उसकी शादी पहले ही तय हो चुकी थी किसीसे,
हमारा दिल न हो सका संतुष्ट बस इसीसे|
उसेक गम में जाम उठाया, बन गए देवदास,
जीवन जीने की हमारी खो गयी थी आस,
हम तो बस रह गए थे सबके लिए उपहास|
फिर हम झूमे नाचे, किया खूब डांस,
एक परी को दिल दिया, शुरू हुआ रोमांस,
उमंग वापस आई हैं, जिंदगी लाया हूँ मैं बुला,
पर पहले प्यार की याद को क्या मैं सकूंगा भुला?
देश मेरे देश मेरे
आजादी की सौंधी खुशबू,
जब नथुनों में भर आती है,
सर उठाकर जीने की,
तब आदत सी हो जाती है|
संघर्ष किया था जब सबने,
वो साल पुराना लगता है,
खून बहाया था जिसने,
वो भाई बेगाना लगता है|
बापू की तस्वीर पर,
बस फूल चड़ाए जाते हैं,
१०% कमीशन पर,
सब काम कराये जाते हैं|
आजादी बोले कुछ, तू सुन,
६३ साल की हो गयी हूँ में,
अब मुझमें वैसी बात नहीं,
मेरे बूढ़े कन्धों में अब,
पहले जैसी जान नहीं|
मेरे बच्चों अब तुम पर है,
की देश का आगे क्या कुछ हो,
अपने सपने तुम खुद देखो,
तुम खुद ही उन्हें साकार करो|
हे माँ तू ऐसा क्यों बोले,
तूने तो बहुत कुछ है दिया,
हिम्मत, सोच और इज्जत का,
जीवन में हमारे प्रकाश किया|
महनत करेंगे सब मिलकर,
देश को आगे ले जायेंगे,
ज़रुरत पड़ी तो फिर एक बार,
हम अपना लहू बहाएंगे|
देश मेरे देश मेरे,
तू ही मेरा तीर्थ है,
तू ही मेरे चारों धाम,
मैं जी लूँगा फिर और कभी,
इस बार करी जां तेरे नाम|
नींद शर्मा गयी
आखें उसके दीदार के नशे में डूबीं थी ऐसे,
की नींद भी शर्मा के रह गयी रात भर,
लफ्ज़ मिले नहीं बहुत सोच कर,
जब मिले तो जबाँ दगा दे गयी,
हाथ घायल थे उसके भर स्पर्श से,
कलम उठाई तो सियाही सूखी निकली,
बहुत हिम्मत कर उस दिन स्टेशन पहुंचे हम,
जालिम ट्रेन को भी उसी दिन समय पर आना था,
निगाहों ने बस उसको ढूँढा सारी तरफ,
जब दिखी तभी बारिश आ गयी,
मिलना था उससे जब, ख्वाबों में,
कातिल एक बार फिर नींद दगा दे गयी|
अनजान हँसी
पिछली सर्दी की बात है ये
घर पर था छुट्टी मना रहा
धुंध की चादर ओड़े था
सूरज भी ठुर ठुर ठिठुर रहा |
सुबह सुबह सी दोपहर थी जो
तफरी करने को निकला मैं
सायें सायें कर हवा कटी
सुड सुड करती सी नाक बही |
साथ मैं मेरे जॉय थी था
गुस्से से मुझको घूर रहा
खुद को तो चले मारने तुम
मेरे को काहे खत्म करो |
तभी दिखी कुछ दूर तलक
एक जानी पहचानी अनजान झलक
वो खिल खिल करती एक मस्त हँसी
जॉय की भी पूँछ हिली |
छम छम करती वो हुस्न परी
गरमाती मौसम तरी तरी
जी भरकर देख ना पाया मैं
कुछ और धुंध सी बही तभी |
वो चेहरा ढूँढ रहा तबसे
एक झलक मांग रहा रबसे
पर मिल ना पाया मुझे कभी
भूलने की कोशिश करुँ अभी |
वो थी एक अनजान हसीं
मेरी धड़कन उसमें है फसीं
पिछली सर्दी की जो है बात
इस सर्दी मैं काश हो मुलाक़ात |
रैगिंग
बड़े जोश से चले निकल के,
नन्हे माँ के लाल रे|
मन में जैसे उछल रहे थे,
बन्दर डाल डाल रे||
स्कूल से जाना था कॉलेज,
फुदक रही थी चाल रे|
हृदय में थी नयी उमंगें,
खोजेंगे जल ताल रे||
कॉलेज का था एक हॉस्टल,
कमरे थे बेहाल रे|
देख उनको बुद्धि ठनकी,
आया घर का ख्याल रे||
घूर रहे थे सभी सीनिअर,
होठ थे उनके लाल रे|
सोच रहे थे आया मुर्गा,
रैगिंग ले ही डाल रे||
पुछा नाम पता frequency,
हुए शर्म से ला रे|
पकड़ के ले गए नाई के,
कटवाए हमारे बाल रे||
फिर चला चल चित्र का दौर,
इज्जत ली निकाल रे|
Superman हमें बनाया,
He-man बनकर किया धमाल रे||
गर्ल्स हॉस्टल के चक्कर लगवाए,
क्या क्या सवाल न हमसे पुछवाये|
चवन्नी अठन्नी थी हमने निकाली,
हस हस के बेहाल रे|
दुपक रहे थे हम कमरों में,
सीना अन्दर दाल रे||
धीरे धीरे थी बात खुली,
पूरी तस्वीर थी साफ़ धुली,
वो तो सिर्फ एक मुखौटा था,
सच्चाई से कुछ छोटा था||
पूरा परिदृश्य ही बदल गया,
हॉस्टल लगने लगा नया,
सब सीनिअर अपने दोस्त बने,
साथ में मौज मस्ती करे,
P.D.P तो एक बहाना था,
सबको नजदीक जो आना था||
Life
Like an encumbrance to levy.
Challenges pouring in every hour,
Like thorns of a rose flower.
Which smells good,
But stings like wood.
Pressure building on all sides.
Not a moment to lay beside.
Like a complicated preparation of glycene,
With everyone so keen,
To uncover the unseen.
I think how good it had been,
If worries were not known and I with my fairy queen,
Striding along the path of my life,
Free from all strife.
No feeling to outshine others,
But a mind to follow,
And sooth others like a pillow.
With feeling of communism,
फिर वो पुरानी याद आई
क्यों रह रह कर आते सपने,
उन पीर परायी रातों के,
क्यों होती है दिल में हलचल,
उन नई पुरानी बातों से,
क्यों जहन में अटकी हैं यादें,
जब गलियों की कच्ची सड़कें,
सावन में पक्की लगती थीं,
जब टूटी सायिकल की गद्दी,
मोटर से मुलायम लगती थी,
जब आंच पे पकती रोटी भी,
जायके में अव्वल लगती थी,
क्या दौर था वो, कुछ और था वो,
सुख चैन का बस सिरमौर था जो,
वो समां पुराना चला गया,
कुछ और देर तक रहता फिर,
मिल बैठ के बातें करते हम,
कोई रीत पुरानी गाता में,
कुछ गम मिल जुलकर करते कम|
मैदान में वो गिरना पड़ना,
हर बात पे बालक हठ करना,
जो हवा बनाई डींगे हांक,
सब अव्वल बैटिंग देते थे,
जो आड़े आया कोई सो,
अपने सुदबुध में ऐंठे थे,
जो पेड़ सुनहरा गुलमोहरी,
दिनभर हरिया बरसाता था,
वोह बेल हवा में टूट टूट,
और नीम का मस्ती लहराना,
क्या दौर था वो, कुछ और था वो,
सुख चैन का बस सिरमौर था जो,
वो समां पुराना चला गया,
कुछ और देर तक रहता फिर,
मिल बैठ के बातें करते हम,
कोई रीत पुरानी गाता में,
कुछ गम मिल जुलकर करते कम|
शादी का मौसम सुनते ही,
मुहँ में पानी का आ जाना,
ख्वाब में भी खुरचन लड्डू की,
आपस में कुश्ती करवाना,
और कचौड़ी पूड़ी से,
घी का टप टप रिसते जाना,
और नहीं, बस और नहीं,
एक और तो लो, तुम्हें मेरी कसम,
भाभी देवर का टकराना,
क्या दौर था वो, कुछ और था वो,
सुख चैन का बस सिरमौर था जो,
वो समां पुराना चला गया,
कुछ और देर तक रहता फिर,
मिल बैठ के बातें करते हम,
कोई रीत पुरानी गाता में,
कुछ गम मिल जुलकर करते कम|
बीमार था जब, सब याद है अब,
दादी ने नजर उतारी थी,
अलाएँ बालाएं सब टल जाएँ,
इस बात की दुआ पुकारी थी,
दीवाली में पूरे कुनबे का,
मिल जुलकर बाड़ा चमकाना,
कुछ दीपक से, कुछ बत्ती से,
सब ओर प्रकाश का टिम टाना,
सब बच्चों को नगदी मिलना,
बड़ों का आशीर्वाद कहलाता था,
एक सुई, एक धागे में,
सारा संसार पिर जाता था,
क्या दौर था वो, कुछ और था वो,
सुख चैन का बस सिरमौर था जो,
वो समां पुराना चला गया,
कुछ और देर तक रहता फिर,
मिल बैठ के बातें करते हम,
कोई रीत पुरानी गाता में,
कुछ गम मिल जुलकर करते कम|
हो गई पुरानी सब बातें,
यादें भी धुंधली हो हैं चली,
पर मन जाने क्यों अटका है,
कभी ना जाना, उसी गली,
कभी कभी एक आस जगे,
क्यों ना कल जब सो के उठें,
तो सुबह उन्हीं गलियों में हो,
रात उन्हीं अठखलियों से हो,
पर बीत चुका कब आया है,
बीते की याद ही आई है,
क्या दौर था वो, कुछ और था वो,
सुख चैन का बस सिरमौर था जो,
वो समां पुराना चला गया,
कुछ और देर तक रहता फिर,
मिल बैठ के बातें करते हम,
कोई रीत पुरानी गाता में,
कुछ गम मिल जुलकर करते कम|
भूली बिसरी यादें
कहाँ-कहाँ से पकड़ से लाये,
कैसे करतब करवाने को|
बंद कर दिए एक पिंजरे मैं,
आपस मैं खोपड़ टकराने को|
तीन मोर और दो थी मोरनी,
नई-नई पहचान हुई|
पग-पग कर थी राह जोड़नी,
कच्चा था धागा टूटी थी सुई|
प्यार था उमड़ा जिन बातों पर,
वो बातें कड़वी याद हुईं|
एक हाथ से ताली नहीं बजती,
कहावत ये साकार हुई|
मोर-मोरनी लड़े औ झगडे,
अपनों का नाम खराब किया|
होते हैं जीवन में लाखों लफड़े,
पर हाय ये विष क्यों सबने पिया|
नजरें मिला पाओगे अब तुम,
दर्पण मैं अपने आप से क्या|
गिर कर भी उठ पाओगे क्या,
नजरों मैं अपने आप के तुम|
भगवान् इन्हें सदबुद्धि देना,
आगें करतब कुछ ऐसा करें|
सब देखें और गुणगान करें,
कि मोर-मोरनी हों तो ऐसे,
और सभी का ये सम्मान करें|
इंतज़ार
इस पत्र के पटल पर दिल की इबारत है लिखी,
इसी को मेरा प्रेम पत्र समझना तुम सखी|
दो-चार बार जो तुम मुझसे मिली,
दिल के आँगन में कली नई खिली।
नोट्स के बहाने हुए पहली मुलाक़ात,
उसी पल हमने अपना दिल दिया तुम्हारे हाथ।
चांदी के सिक्कों सा तेरा तन,
तेरी खिलखिलाहट और यह चंचल मन।
मेरे इशारों को तू न समझ पायी,
या मेरे खुदा तेरी दुहाई।
दिल की बात कहने की कच्ची है उमर,
पर जब भी कहूँगा तुझे ही कहूँगा ऐ जानेजिगर बन मेरी हमसफ़र।
इस दिल के बहकाने पर न चलूँगा मैं,
प्यार की कसौटी पर खुद को परखूँगा मैं।
हाय हैलो का यह प्रेम नहीं है,
इससे आगे भी न बढ़ सका यह भी सही है।
जब मैं बन जाऊंगा इस काबिल,
कि सकूँगा तेरा हाथ थाम, तभी समझूंगा तुझे अपनी रंगीन शाम।
बस तब तक मेरा इंतज़ार करना,
वरना …
